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हाइपरटेंशन यानी हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के मरीजों के लिठअचà¥à¤›à¥€ खबर है। अब उनका बीपी लेवल 130/90mmHg तक होने के बाद à¤à¥€ वे राहत की सांस ले सकते हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इसके लिठकोई दवा खाने की जरà¥à¤°à¤¤ नहीं होगी। नैशनल और इंटरनैशनल गाइडलाइंस के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का नंबर 130/90 होने के बाद à¤à¥€ सेफ माना गया है। बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों को और राहत दी गई है। अब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इलाज की जरà¥à¤°à¤¤ बीपी का नंबर 150/90 से ऊपर जाने के बाद ही पड़ेगी। दिलà¥à¤²à¥€ के डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¥€ अब इसी मानक के आधार पर इलाज कर रहे हैं।
अमेरिकन सोसायटी ऑफ हाइपरटेंशन की गाइडलाइन के बाद अब जॉइंट नैशनल कमिटी ने 8 पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ सà¥à¤à¤¾à¤ हैं। नैशनल हारà¥à¤Ÿ इंसà¥à¤Ÿà¤¿à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट के डायरेकà¥à¤Ÿà¤° डॉ. ओ. पी. यादव का कहना है कि बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का मतलब है बॉडी के ऑरà¥à¤—न तक बà¥à¤²à¤¡ पहà¥à¤‚चाना। अब तक हम केवल नंबर पर फोकस रखते थे, लेकिन अब उमà¥à¤° को à¤à¥€ इससे जोड़ा गया और यह फैसला किया गया कि उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का नंबर अलग-अलग हो सकता है। लेकिन इस गाइडलाइन के साथ-साथ मरीज की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ देखनी होती है। हमें देखना होता है कि खून की सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ किस पà¥à¤°à¤•ार हो रही है? कहीं बीपी डà¥à¤°à¥‰à¤ª करने से किडनी में परफà¥à¤¯à¥‚शन तो नहीं हो रहा है? बीपी डà¥à¤°à¥‰à¤ª से मरीज को कमजोरी तो नहीं आ रही है? à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मरीज का बीपी लेवल बढ़ाना होता है। कई मरीज à¤à¤¸à¥‡ होते हैं जो कहते हैं कि 130/90 पर वे बेहतर फील करते हैं। तब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस नंबर पर ही रहने देते हैं।
हारà¥à¤Ÿ सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤²à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ डॉ. के. के. अगà¥à¤°à¤µà¤¾à¤² का कहना है कि अà¤à¥€ à¤à¥€ आइडियल बीपी का नंबर 120/80 ही है। लेकिन, नई गाइडलाइन के तहत अगर किसी का बीपी नंबर 130/90 à¤à¥€ हो तो इस नंबर को कम करने के लिठदवा की जरà¥à¤°à¤¤ नहीं है। à¤à¤¸à¥‡ में मरीज केवल लाइफ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² के जरिठइसे कम करने की कोशिश करें। गाइडलाइन के तहत बीपी के 140/90 से ऊपर जाने के बाद ही दवा के जरिठकंटà¥à¤°à¥‹à¤² करने की जरà¥à¤°à¤¤ है। वहीं, बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के लिठयह नंबर 150/90 फिकà¥à¤¸ किया गया है। 60 साल से ऊपर के लोगों के लिठअब इसी नंबर पर इलाज की जरà¥à¤°à¤¤ होगी।
फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² के कारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ डॉ. विनय सांघी का कहना है कि 20 साल पहले उमà¥à¤° के साथ बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° (बीपी) का नंबर बढ़ना खतरनाक माना जाता था। पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में यही धारणा थी। लेकिन जब डेटा आया तो पता चला कि 60 साल से ऊपर वालों का बीपी बढ़ने से बà¥à¤°à¥‡à¤¨ अटैक जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है। इसके बाद बीपी का लेवल 135 से ऊपर नहीं रखा गया। लेकिन, फिर सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ हà¥à¤ˆ तो पता चला कि 135 नंबर से कम रखने के बाद à¤à¥€ बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों में बà¥à¤°à¥‡à¤¨ अटैक कम नहीं हà¥à¤†à¥¤ यानी कि साइड इफेकà¥à¤Ÿ का गà¥à¤°à¤¾à¤« 'जे' शकà¥à¤² में बन रहा था। मतलब à¤à¤• समय तक तो साइड इफेकà¥à¤Ÿ कम हो रहा था, लेकिन बाद में यह फिर बढ़ने लगा था। इसके बाद ही नई गाइडलाइन में उमà¥à¤° के साथ नंबर में छूट दी गई है और हम इस गाइडलाइन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट कर रहे हैं।
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